
जो छपता है और जो सच में काम करता है — इन दोनों में फ़र्क क्यों है?
पहले एक ज़रूरी सवाल क्या आपने कभी सोचा है कि डॉक्टर जो दवाई देता है, वो किसी मेडिकल जर्नल में “असरदार” लिखी होती है — लेकिन असल ज़िंदगी में उससे नुकसान हो जाता है? और दूसरी तरफ़ — कुंभक थेरेपी जैसी चीज़ें, जो हज़ारों लोगों
